Kati Bihu - काटी बिहु 18/10/2022 Images - Hp Video Status

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Wednesday 12 October 2022

Kati Bihu - काटी बिहु 18/10/2022 Images

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Kati Bihu is celebrated on the first day of the ‘Kati’ month in the Assamese calendar — usually falling somewhere in mid-October. This year, it is observed on October 18. The festival marks the relocation of the rice crop and the beginning of the fresh harvest season. Kati Bihu is an observation of service, penance, and the hope for a better future. The festival is celebrated across the state of Assam — although all Assamese tribes have their own rituals and interpretations of the day. Lamps are lit outside the homes, and a pathway of bamboos is constructed as a trail for the ancestors.

Kati Bihu is a regional public holiday in the Indian state of Assam on the first day of the month of Kati (Kartik) in the Assamese calendar.

Bihu are three festivals held in Assam; Bhogali or Magh Bihu is observed on January 13th or 14th, Rongali or Bohag Bihu is observed on April 14th or 15th, Kongali or Kati Bihu is observed in October.

All three of the Bihu are related to agriculture. The other two Bihu mark key dates in the harvest. This Bihu is celebrated during the time of relocation of the rice sapling - Kati means "cut".

Kati Bihu is also called Kongali ("Poor") as the granaries are usually empty and there is not much to eat at this time of the year.

This means Kati Bihu is not as flamboyant a festival as the other Bihus and the festivities are more sombre in nature.

This Bihu is celebrated by the lighting of lamps or saaki (candles) in different parts of the house. The main lamp is lit in the courtyard near the sacred Tulsi plant.

For Kati Bihu, the plant is cleaned and is placed on an earthen platform called a "Tulsi Bheti". Offerings and prayers are made to the Goddess Tulsi for the wellbeing of the family and for a good harvest. This formal procedure continues for the whole month of Kati.

In the paddy fields, farmers light a special type of lamp, called 'Akaxh Banti' (Sky candle). These mustard oil lamps are placed high on the tips of tall bamboo poles. It is believed these lamps are lit to guide ancestors to heaven, though they serve a practical purpose by drawing insects to the flame and their doom, which helps keep the crops healthy.

Kati Bihu, also known as Kongali Bihu, is a unique festival observed in India’s North-Eastern state of Assam. It usually falls in the middle of October and is celebrated with a somber flavor. There is less merriment amongst the observing folks — as the festival is all about the constraining conditions of the month. Despite being one of the grandest observations of the land, the spirit of the holiday is not joyous. Rather, the festival reflects on the year bygone. The month of October is the sowing season in Assam. The freshly sprouting paddy fields and the empty granaries are symbolic of the ‘Kangal’ — which translates to ‘broke.’

Kati Bihu is one of the three most significant festivals of the Assamese people — including Bhogali Bihu and Rongali Bihu. Outside their homes, people light clay lamps, and the holy basil plant is decked with garlands and lights. The tradition of burning the lamps dates back to ancient celebrations when the lanterns on the paddy field attracted insects and served as a natural insecticide. To guide the ancestor’s home, traditional lamps, ‘saaki,’ are placed on the tops of baboon sticks.

Kati Bihu is celebrated with great sincerity by the entire state. It is one of the few unique festivals of India which surpasses religion, social status, and caste, as people from all walks of life come together and observe the solemnity of their conditions.

काटी बिहु 2022 - अक्टूबर 18 (मंगलवार)

असम में बिहू त्योहार सबसे ऊपर मनाया जाता है। काटी बिहू या कोंगाली बिहू भी इसी का एक अंग है। ये बिहु हर साल अक्टूबर महीने में आता है। इस बिहु में थोड़ा कम उल्लास और हर्ष होता है। इस महीने में घरों में रखा अनाज लगभग खत्म हो जाता है, इसलिये असमी लोग अनाज भंडार, तुलसी, और धान के खेत के पास मिट्टी का दीया जलाते हैं। काटी बिहु थोड़ा गंभीरता और विचार विमर्श करने वाला पर्व है। जहां पुरानी फसल का अनाज खत्म हो चुका होता है और लोग अपने देवता की प्रार्थना करते हुए उनसे अच्छी फसल होने की कामना करते हैं। माता लक्ष्मी की मुख्यत: पूजा की जाती है।


काटी बिहु के दौरान खेतों में दीये तो जलाए ही जाते हैं साथ ही में किसान अपने खेतों में बांस के डंडे से आकाश दीप लगाते हैं। ये आकाश दीप आत्माओं को स्वर्ग की तरफ रास्ता दिखाने के लिये जलाए जाते हैं।

Kati Bihu Festival 2022 

दोस्‍तो आप सभी जानते है हमारा भारत देश त्‍यौहारो का देश कहा गया है। जहा हर दिन कोई त्‍यौहार, व्रत आदि जरूर होता है। जिनमे से ऐसे बहुत से त्‍यौहार है जो की पूरे भारतवर्ष में बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है। जैसे- होली, दीपावली, दशहरा, नवरात्रि, रक्षाबंधन आदि। किन्‍तु भारत के उत्तर पूर्वी राज्‍यों में कुछ खास त्‍यौहार मनाऐ जाते है जो वहा के लोगो के लिए बहुत ही खास होते है।

जिनमे से एक है काती बिहू पर्व जो की प्रतिवर्ष अक्‍टूबर के महीने में मनाया जाता है। इस बार यह उत्‍सव 18 अक्‍टूबर सोमवार के दिन पड़ रहा है। जो की खासतौर पर भारत के पूर्वी राज्‍यों में बड़े ही हर्षो उल्‍लाहस के साथ मनाया जाता है। ऐसे में अगर आप काती बिहू त्‍यौहार से जुड़ी समस्‍त जानकारी पाना चाहते है। तो पोस्‍ट के अन्‍त तक बने रहे।

वैसे तो वर्ष में तीन बार बिहू का पर्व Bihu मनाया जाता है। जो खासतौर पर किसानो के द्वारा मनाया जाता है। एक तो ”बोहाग पर्व” जो वैसाख में मनाया जाता है। तथा दूसरा है ‘माघ बिहू, माघ कें महीने(मकर संक्रांति पर) में तथा तीसरा ”काटी बिहू’ जो की अक्‍टूबर अर्थात कार्तिक के महिने में मनाया जाता है। इन सभी त्‍यौहारो में से सबसे महत्‍वपूर्ण ”बोहाग बिहू” है जो प्रतिवर्ष अप्रैल के महीने में मनाया जाता है। इस त्‍यौहार को कई जगहो पर ”रोंगाली बिहू व हतबिहू भी कहा जाता है।

Kati Bihu Festival (काती बिहू उत्‍सव कैसे मनाते है)

काती बिहू त्‍यौहार को खासतौर पर भारत के असम राज्‍य में बडे हर्षो उल्‍लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन स्‍त्री व पुरूष रंगीन व पारंपरिक सुन्‍दर कपड़े पहनते है। तथा एक-दूसरे के हाथ पकड़कर एक गोला बनाकर चारो तरफ घूते है। साथ में कुछ लोग ढोल व पीपा आदि बजाते है औरे वे सभी गोल-गोल घूमते हुए नृत्‍य करते है।

Kati Bihu Festival in Hindi

दरसल में असम राज्‍य के लोग आषाढ़ व श्रावन महीने में धाम की खेती बोते है। जो की आश्विन महीने अन्तिम दिनों में पककर तैयार होती है। जिसे काटने के बाद उनके घर में मानो स्‍वयं लक्ष्‍मी जी आ गई हो क्‍योकि वो बडे ही उत्‍सव पूर्वक उस धान को अपने घर पर लाते है। और कार्तिक की संक्रांति को शुभ मंगलकामना के लिए तुलसी के पेड के नीचे दीपक जलाते है। इसी परंपरा का काती बिहू कहा जाता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दे काती बिहू को कृषि का त्‍यौहार व कंगाली बिहू (गरीबों का त्‍यौहार) भी कहा जाता है। ”कोंगाल शब्‍द का अर्थ गरीब होता है। इसके अलावा इस दिन साकी नामक दीपक को खेतों के किनारे बांस के खंभो के नीचे जलाया जाता है। इसके अलावा वहा के किसान कीटो से अपने खेतो की रक्षा करने के लिए मंत्रों का जाप करते है। और एक अच्‍छी फसल की कामना करते है।

दोस्‍तो आज के इस लेख में हमने आपको काती बिहू उत्‍सव Kati Bihu Festival 2022 के बारे में महत्‍वपूर्ण जानकारी प्रदान की है। यदि हमारे द्वारा प्रदान की गई जानकारी पसंद आई हो तो लाईक करे व अपने मिलने वालो के पास शेयर करे। और यदि आपके मन में किसी प्रकार को प्रश्‍न है तो कमंट करके जरूर पूछे। धन्‍यवाद

Kati Bihu 2022 Wishes 

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