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World Engineers Day, celebrated every September 15, serves to appreciate engineers and their contributions to society. Engineers are professionals who invent, design, and build complex systems, structures, and materials in order to fulfill functional objectives and deliverables, keeping in mind factors such as practicality, regulation, safety, and cost. The word ‘engineer’ is derived from the Latin words ‘ingeniare’ (which means ‘to create or generate’) and ‘ingenium’ (which means ‘cleverness’). An engineer typically would require foundational qualifications of a four-year bachelor’s degree in any of several engineering disciplines — or, in certain peculiar jurisdictions, a master’s degree in an engineering discipline with an addition of four to six years of peer-reviewed professional practice, which would then result in a thesis, and then, conclusively, a passing of engineering board examinations.


HISTORY OF WORLD ENGINEERS DAY

The inventions of Thomas Savery and James Watt laid the foundation of modern mechanical engineering. The development of specialized machines, as well as the maintenance of these tools during the Industrial Revolution, gave rise to the rapid expansion of mechanical engineering in its birthplace of Britain and beyond.


The field of electrical engineering was marked and impacted by the experiments of Alessandro Volta in the 19th century. Other major contributions to the development of the discipline were the experiments of Michael Faraday, Georg Ohm, and others — as well as the groundbreaking invention of the electric motor in 1872. This field of engineering eventually became a profession late in the 19th century. Electrical engineers had built a global electric telegraph network and the first electrical engineering institutions backing this discipline were established in the United States and the United Kingdom. While it is difficult to name the first electrical engineer with certainty, it is noteworthy that Francis Ronalds was a standout individual in the field, having created the first working electric telegraph system in 1816 and documented a personal vision of the transformation of the world by electricity.


The field of electronics was founded in the late 19th century through the work of James Maxwell and Heinrich Hertz. The eventual inventions of the vacuum tube and the transistor would further bolster the development of electronics to the extent that practitioners of electrical and electronics engineering currently outnumber any other engineering specialty. Chemical engineering also developed in the 19th century, during the Industrial Revolution. With the increase in need, and invariably demand, for large-scale chemical production came the creation of an entirely new industry: chemical engineering.


Engineers Day


Engineers Day 2022: हर साल देश में 15 सितंबर का दिन इंजीनियर्स डे के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन देश के महान इंजीनियर और भारत रत्न से सम्मानित मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को समर्पित है।

Engineers Day

Engineers Day 2022: भारत में हर साल 15 सितंबर को इंजीनियर डे यानी अभियंता दिवस मनाया जाता है। इस दिन भारत के महान इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म हुआ था। विश्वेश्वरैया ने आधुनिक भारत के निर्माण में विशेष योगदान दिया। कई बड़ी नदियों पर बांध और पुल बनाएं। उनके योगदान को याद करते हुए इंजीनियरों के सम्मान में इस दिन को मनाते हैं। आज भारत के पास कई होनहार और अव्वल दर्जे के इंजीनियर हैं। इनमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल हैं। देश की पहली महिला इंजीनियर ए ललिता थीं। जिन्होंने महिलाओं के लिए इंजीनियरिंग की राह खोली। इसी दिशा में कई होनहार महिला इंजीनियर हुईं, जिन्होंने सिर्फ इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं ली, बल्कि अपने काम से अभियंताओं की श्रेणी में महिलाओं के लिए स्थान बना लिया। चलिए जानते हैं ऐसी ही महिला इंजीनियर के बारे में, जिन्होंने अपने क्षेत्र में इतिहास रच दिया।


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पहली महिला खनन इंजीनियर

आकांक्षा कुमारी भूमिगत खदान में काम करने वाली पहली महिला खनन इंजीनियर हैं। झारखंड के हजारीबाग जिले की रहने वाली आकांक्षा ने बिरसा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी सिंदरी से स्नातक किया है। महज 25 साल की उम्र में आकांक्षा कुमारी ने कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) को ज्वाइन किया और सीआईएल की दूसरी महिला खनन इंजीनियर बन गईं। आकांक्षा झारखंड में उत्तरी करनपुरा क्षेत्र में चुरी भूमिगत खदानों में सीआईएल में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। सीआईएल में काम करने से पहले आकांक्षा ने राजस्थान में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की बलरिया खान में तीन साल काम किया था।


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पहली उत्खनन इंजीनियर शिवानी मीणा

आकांक्षा कुमारी की तरह ही राजस्थान की शिवानी मीणा ने भी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में इतिहास रचा है। शिवानी मीणा सीसीएल की पहली उत्खनन इंजीनियर हैं। सीसीएल की रजरप्पा परियोजना में उनका खास योगदान रहा। शिवानी ने रजरप्पा क्षेत्र की मैकेनाइज्ड खुली खदान में काम किया। वह उत्खनन कैडर की पहली महिला इंजीनियर हैं, जिन्होंने खुली खदान में कार्य किया। शिवानी मीणा राजस्थान के भरतपुर की रहने वाली हैं। उन्होंने आईआईटी जोधपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा हासिल करने के बाद भारी भरकम मशीनों के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी संभाली।


Engineers Day


Engineers Day 2022: हर साल देश में 15 सितंबर का दिन इंजीनियर्स डे ( Engineer's Day ) के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन देश के महान इंजीनियर और भारत रत्न से सम्मानित मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को समर्पित है। एम विश्वेश्वरैया ने राष्ट्र निर्माण में बहुत बड़ा योगदान दिया था, ऐसे में उनके जन्मदिन 15 सितंबर को देश भर में इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। सिविल इंजीनियर विश्वेश्वरैया ने आधुनिक भारत के बांधो, जलाशयों और जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी।  सरकार ने साल 1955 में इन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया था। 

Engineers Day

यह दिन देश के उन सभी इंजीनियरों की मेहनत और लगन को सलाम करने का दिन है जो देश के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं। इन्हीं इंजीनियरों के अथक प्रयासों की बदौलत लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। देश के इंजीनियरों ने अपनी खोजों से आमजनजीवन को सुगम बना दिया है।

कौन थे एम विश्वेश्वरैया

विश्वेश्वरैया को देश में सर एमवी के नाम से भी जाना जाता था। भारत रत्न से सम्मानित एम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को मैसूर के कोलार जिले स्थित क्काबल्लापुर तालुक में एक तेलुगू परिवार में हुआ था। विश्वेश्वरैया के पिता का नाम श्रीनिवास शास्त्री था, जो संस्कृत के विद्वान और आयुर्वेद के डॉक्टर थे। 

1883 में पूना के साइंस कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद विश्वेश्वरैया को तत्काल ही सहायक इंजीनियर पद पर सरकारी नौकरी मिल गई थी।  वे मैसूर के 19वें दीवान थे और 1912 से 1918 तक रहे।  मैसूर में किए गए उनके कामों के कारण उन्हें मॉर्डन मैसूर का पिता कहा जाता है। उन्होंने मैसूर सरकार के साथ मिलकर कई फैक्ट्रियों और शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना करवाई थी। उन्होंने मांड्या जिले में बने कृष्णराज सागर बांध के निर्माण का मुख्य योगदान दिया था। डॉ. मोक्षगुंडम को कर्नाटक का भागीरथ भी कहा जाता है।  1962 में 102 साल की उम्र में डॉ. मोक्षगुंडम का निधन हुआ। 


Engineers Day


सदियों पहले जो लोग अपनी नींद, खाना, हँसी और जीवन के अन्य सुखों का त्याग करते थे,
उन्हें ‘महात्मा’ या फिर ‘संत’ कहा जाता था, लेकिन अब उन्हें Engineers कहा जाता है।

जिसका चित पावन होता है 
नहीं भारी बस्ते ढोता है,
बैक आने पर नहीं रोता है
रातों को भी नहीं सोता है.
वही असल में इंजिनियर होता हैं।

Engineers Day

किताबें खुली हो या बंद हो
पढ़ाई लास्ट नाईट ही होती है
कैसे कहूँ मैं वो यारा
ये इंजीनियरिंग ऐसे ही होती है 
हैप्पी इंजीनियर्स डे 2022


Engineers Day


इंजीनियर के जीवन में परिवार और प्रेम कहाँ होता है
इनके तो प्रोग्राम में सिर्फ एरर होता है। 
हैप्पी इंजीनियर्स डे 2022 

इंजिनियर होने का यह भी एक फायदा है,
परिवार और समाज में मिलता इज्जत ज्यादा है।


Engineers Day


चार साल, 40 विषय, 4 हजार असाइनमेंट, 4 हजार घंटे, एक आम इंसान ऐसा नहीं कर सकता है, ऐसे करने वाले सुपर हीरो को इंजीनियरिंग के छात्र कहते हैं, हैप्पी इंजीनियर्स डे।

हर इंसान इंजिनियर हैं कुछ मकान बनाते हैं कुछ सॉफ्टवेयर बनाते हैं कुछ मशीन बनाते हैं और कुछ सपने बनाते हैं और हम जैसे उनकी कहानियों को स्याही में डुबोकर उन्हें अमर बनाते हैं।  हैप्पी इंजीनियर्स डे 2022


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