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आखिर क्यों भगवान शिव को लेना पड़ा था हनुमान के रूप में अवतार, ये है इसका कारण - Stories

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, त्रिदेवों में भोलेनाथ को संहारक माना जाता है | जब सृष्टि में पापकर्म अधिक बढ़ जाते हैं और प्रकृति और पृथ्वी पापों के बोझ से कराह उठती है, तब पृथ्वी पर महादेव का अवतरण होता है और वह संसार में पापियों का संहार करके नयी सृष्टि की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करते हैं | भोलेनाथ नें पृथ्वी पर कई बार अवतार लिए हैं जिनमे से कुछ पूर्णावतार थे और कुछ अंशावतार थे | उनके कुल 12 रुद्रावतार हुए और इनमे से 11वें अवतार बजरंगबली हनुमान हैं |

माता अंजनी ने कड़ी तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था और उनसे आशीर्वाद के रूप में एक महाप्रतापी पुत्र की कामना की थी | इसके बाद भगवान शिव ने पवन देव के रूप में रौद्र शक्ति का अंश यज्ञ कुंड में डाला और यही शक्ति माता अंजनी के गर्भ में प्रवेश कर गयी | जिसके बाद हनुमान जी का जन्म हुआ था |

पौराणिक कथाओं के अनुसार लंकापति रावण का संहार करने के लिए भगवान विष्णु नें पृथ्वी पर श्रीराम के रूप में जन्म लिया था | उस समय विभिन्न देवों ने राम की सहायता के लिए पृथ्वी पर अवतार लिए थे |इनमें से महादेव ने हनुमान जी के रूप में अवतार लिया था | बजरंगबली हनुमान भगवान राम के परम सेवक हैं, इन्हें संकटमोचन भी कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों को सभी व्याधियों से दूर रखते हैं |

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